धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा, खिलाड़ियों को 283 नौकरियां और वकीलों का मानदेय भी बढ़ा

Published: 12 Sep 2026, 12:53 PM
Category: राज्य   |   By: Jokhim News

धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा, खिलाड़ियों को 283 नौकरियां और वकीलों का मानदेय भी बढ़ा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि, खिलाड़ियों के लिए नौकरी के अवसर और वकीलों के मानदेय में बढ़ोतरी जैसे अहम फैसले लिए गए।

कैबिनेट ने एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को 17,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया है। यह फैसला इंटर्न डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, जो पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे थे।

खेल नीति 2021 के तहत राज्य के खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। विभिन्न विभागों में कुल 283 पद पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन पदों में खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और वन विभाग शामिल हैं। इसके तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक व्यायाम के 33 पद भी पदक विजेताओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।

बैठक में वकीलों के हितों का भी ध्यान रखा गया। शासकीय अधिवक्ताओं के शुल्क की दरों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, साथ ही सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों के अधिवक्ताओं के मानदेय में वृद्धि को भी मंजूरी दी गई है।

अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों में खाद्य और विधिक माप विज्ञान विभाग की सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी मिली है। इसके अलावा, उत्तराखंड कारागार विभाग की सेवा नियमावली के तहत अपर महानिदेशक कारागार के एक पद को संवर्गीय ढांचे में रखने की भी मंजूरी दी गई।

देहरादून में जीएमवीएन की पार्किंग में स्थित 972 गज जमीन गढ़वाल सभा को देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई। हरिद्वार में कर्मचारी राज्य बीमा निगम निदेशालय की जमीन के निकट 15 एकड़ भूमि ईएसआई अस्पताल को देने का फैसला भी लिया गया है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में और सुधार होगा।

ऊर्जा विभाग और वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के साथ-साथ उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने को भी मंजूरी मिली है। हालांकि, राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पर्वतीय क्षेत्रों में कम से कम तीन साल सेवा देने के बाद ही पीजी करने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव पर इस बैठक में मुहर नहीं लग पाई।

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