मुख्यमंत्री धामी ने ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा का विशिष्ट केंद्र बनाने पर दिया जोर

Published: 12 Sep 2026, 12:54 PM
Category: राज्य   |   By: Jokhim News

मुख्यमंत्री धामी ने ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा का विशिष्ट केंद्र बनाने पर दिया जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के एक विशिष्ट और प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर ऋषिकुल के समग्र विकास से संबंधित प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री के समक्ष संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप और विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि ऋषिकुल के समग्र विकास में आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्रमुखता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शैक्षणिक, शोध और अध्ययन की व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, ताकि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच एक प्रभावी सेतु बन सके।

धामी ने इस बात पर बल दिया कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखण्ड की प्रमुख पहचान हैं, और राज्य की इस विशिष्ट पहचान को ऋषिकुल के विकास में प्रमुखता से प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान में विकसित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियां उच्च स्तरीय हों और भारतीय ज्ञान, प्राच्य विद्याओं, आयुर्वेद तथा योग से संबंधित अध्ययन एवं शोध के लिए उत्कृष्ट वातावरण तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने परिसर के वास्तुशिल्प को प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भवनों के बाहरी स्वरूप में प्राचीन स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर में उपलब्ध कराई जाने वाली व्यवस्थाएं और सुविधाएं आधुनिकतम हों। उनका मानना है कि प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से परिसर की विशिष्ट पहचान विकसित होगी।

धामी ने कहा कि परियोजना के प्रत्येक पहलू में इसकी मूल अवधारणा स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि संपूर्ण परिसर को इस प्रकार विकसित किया जाए कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म की अनुभूति हो तथा यह उन्हें आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक रूप से आकर्षित करे। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार के विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऋषिकुल के विकास की अवधारणा में हरिद्वार की इस विशिष्टता को केंद्र में रखा जाए, ताकि यहां आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने का अवसर मिले।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजना से संबंधित सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट चरण और समय-सीमा निर्धारित करते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से दो वर्ष के भीतर पूर्ण करने तथा कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा। प्रस्तुतीकरण में ऋषिकुल को योग एवं ध्यान, उच्च स्तरीय शैक्षणिक गतिविधियों, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं वेलनेस, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति तथा शोध गतिविधियों के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित मास्टर प्लान में अकादमिक, योग एवं ध्यान, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं वेलनेस सहित विभिन्न क्षेत्रों के समग्र विकास की अवधारणा रखी गई है।

इस बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, युगल किशोर पंत, श्रीमती रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण श्रीमती सोनिका, अपर सचिव अभिषेक रुहेला एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित उपस्थित थे।

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